रोज़ पंचांग

पंचांग30 दिसंबर 2030, सोमवार

सप्तमी Saptami

शुक्ल पक्ष, पौष मास · नई दिल्ली

सप्तमी तिथि31 दिसंबर 06:53 AMतक

शहर और तारीख

आपका स्थान केवल आपके फ़ोन में सबसे पास का शहर ढूँढने के लिए उपयोग होता है; हम उसे कहीं नहीं भेजते।

चंद्रमा 35% प्रकाशित

सूर्योदय और सूर्यास्त

नई दिल्ली

30 दिसंबर को नई दिल्ली का आसमान: सूर्य और चंद्रमा उसी जगह दिखाए गए हैं जहाँ वे इस समय आसमान में हैं। चित्र वाराणसी के घाट का है; आसमान, सूर्य-चंद्रमा और सभी समय नई दिल्ली के अनुसार हैं।

12:24 PM
सूर्य 38° ऊँचा, दक्षिण में
समय बदलने के लिए आसमान या नीचे की पट्टी खींचें
अमृतकालशुभरोगउद्वेगचरलाभअमृतचररोगकाललाभउद्वेगशुभअमृतचर

आप 30 दिसंबर का 12:24 PM देख रहे हैं।

दिन भर की समय रेखा

चौघड़िया
उद्वेग (Udveg), अशुभ
12:24 PM से 01:41 PM
राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, अभिजित
अभिजित मुहूर्त
12:03 PM से 12:44 PM
तिथि
शुक्ल पक्ष सप्तमी
31 दिसंबर 06:53 AM तक
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद (Purva Bhadrapada)
08:15 PM तक

आसमान, सूर्य और चंद्रमा नई दिल्ली के लिए हमारी गणना से। घाट की फ़ोटो (वाराणसी): Mirrormundo, Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0; आसमान हटाया गया और रोशनी बदली गई।

शुभ और अशुभ मुहूर्त

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:24 AM से 06:19 AM
सूर्योदय से पहले का समय; परंपरा में पूजा और ध्यान के लिए माना जाता है।
अभिजित मुहूर्त
12:03 PM से 12:44 PM
दिन के बीच का मुहूर्त; परंपरा में शुभ माना जाता है।

अशुभ समय

राहु काल
08:31 AM से 09:48 AM
दिन के आठ भागों में से एक; परंपरा में इस समय नया काम शुरू करना टाला जाता है।
यमगण्ड
11:06 AM से 12:24 PM
राहु काल की तरह दिन के आठ भागों में से एक; परंपरा में अशुभ माना जाता है।
गुलिक काल
01:41 PM से 02:59 PM
राहु काल की तरह दिन के आठ भागों में से एक; परंपरा में अशुभ माना जाता है।

पूरा पंचांग

तिथि Tithi
सप्तमी (Saptami) 31 दिसंबर 06:53 AM तक
अष्टमी (Ashtami) अगले सूर्योदय तक
नक्षत्र Nakshatra
पूर्वा भाद्रपद (Purva Bhadrapada) 08:15 PM तक
उत्तरा भाद्रपद (Uttara Bhadrapada) अगले सूर्योदय तक
योग Yoga
व्यतीपात (Vyatipata) 06:01 PM तक
वरीयान (Variyana) अगले सूर्योदय तक
करण Karana
गर (Garaja) 06:53 PM तक
वणिज (Vanija) 31 दिसंबर 06:53 AM तक
विष्टि (भद्रा) (Vishti (Bhadra)) अगले सूर्योदय तक
पक्ष
शुक्ल पक्ष
वार
सोमवार
सूर्योदय / सूर्यास्त
07:13 AM / 05:34 PM
चंद्रोदय / चंद्रास्त
11:12 AM / 11:39 PM
दिनमान
10 घंटे 21 मिनट (सूर्योदय से सूर्यास्त तक)
सूर्य / चंद्र राशि
धनु / कुम्भ (सूर्योदय पर)
मास
पौष (पूर्णिमांत)
पौष (अमांत)
दोनों गिनती में इस समय एक ही महीना है।
संवत
विक्रम 2087, शक 1952
वर्ष गिनने की दो पारंपरिक गणनाएँ।

इस महीने की तिथियाँ और चंद्रमा

‹दिसंबर 2030›

हर दिन के नीचे उस दिन सूर्योदय के समय की तिथि है (नई दिल्ली के अनुसार)। शु. = शुक्ल पक्ष, कृ. = कृष्ण पक्ष। पूर्णिमा, अमावस्या और एकादशी तिथि रंग से अलग दिखाई गई हैं। "व्रत" उस दिन लिखा है जिस दिन स्मार्त एकादशी व्रत है, जो कभी-कभी रंग वाली तिथि से अलग दिन होता है; यह केवल दो स्रोतों से मिलाई गई तारीखों पर दिखता है। आज का दिन घेरे में है। पूरी सूची और पारण का समय एकादशी पेज पर है।

कल का पंचांग देखकर योजना बनाते समय दो बातें

तिथि सूर्योदय से गिनी जाती है। पंचांग में किसी दिन की तिथि वह मानी जाती है जो उस दिन सूर्योदय के समय चल रही हो। अगर कोई तिथि दोपहर में शुरू होती है, तो वह अगले दिन के सूर्योदय पर भी चल रही हो सकती है। इसलिए ऊपर तिथि के साथ उसका समाप्ति समय भी दिया है।

व्रत और पर्व की तारीख अलग नियम से तय होती है। कई व्रत (जैसे एकादशी) और पर्व इस बात पर भी निर्भर करते हैं कि तिथि दिन के किस भाग में है। इसलिए किसी व्रत की तारीख के लिए केवल सूर्योदय की तिथि न देखें।

आज का पंचांग देखने के लिए आज का पंचांग खोलें। किसी और तारीख का पंचांग ऊपर "अगला दिन" या महीने के कैलेंडर से देखा जा सकता है।

कल के पंचांग से जुड़े सवाल

कल कौन सी तिथि है?

नई दिल्ली में 30 दिसंबर 2030 को सूर्योदय के समय शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि रहेगी, जो 31 दिसंबर 06:53 AM तक रहेगी। नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद रहेगा।

कल राहु काल कब है?

नई दिल्ली में 30 दिसंबर 2030 को राहु काल 08:31 AM से 09:48 AM तक रहेगा। हर शहर का समय अलग होता है; दूसरे शहर के लिए ऊपर शहर बदलें या राहु काल पेज देखें।

क्या कल का पंचांग अभी से पक्का है?

हाँ। पंचांग के सभी समय सूर्य और चंद्रमा की गणना से निकलते हैं, इसलिए कल या किसी आगे की तारीख का पंचांग आज ही उतना ही सही निकाला जा सकता है जितना आज का। ऊपर "अगला दिन" बटन या महीने के कैलेंडर से आगे की तारीखें देखें।

क्या व्रत की तारीख कल की तिथि से ही तय होती है?

हमेशा नहीं। कई व्रत और पर्व इस पर भी निर्भर करते हैं कि तिथि दिन के किस भाग में है (जैसे एकादशी में दशमी का प्रभाव)। इसलिए किसी व्रत की तारीख के लिए केवल सूर्योदय की तिथि न देखें; अपने परिवार की परंपरा या पुरोहित से पुष्टि करें।