पंचांग की गणना कैसे होती है
इस साइट का हर समय कहाँ से आता है, और हम उसकी जाँच कैसे करते हैं।
संक्षेप में
इस साइट पर कोई भी समय किसी दूसरे पंचांग से कॉपी नहीं किया जाता। हर समय हम खुद सूर्य और चंद्रमा की स्थिति की खगोलीय गणना से निकालते हैं, आपके चुने हुए शहर के अक्षांश और देशांतर के लिए। फिर हम अपनी गणना को एक जाने-माने पंचांग से मिलाकर जाँचते हैं। जाँच के नतीजे नीचे हैं।
खगोलीय गणना
- सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के लिए हम Astronomy Engine (लेखक Don Cross, MIT लाइसेंस) का उपयोग करते हैं, जो खुला स्रोत खगोलीय गणना पुस्तकालय है: github.com/cosinekitty/astronomy।
- नक्षत्र, योग और राशि के लिए निरयन (sidereal) भोगांश चाहिए। इसके लिए हम लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का उपयोग करते हैं। 28 अक्टूबर 2026 को इसका मान 24.2385 अंश है और यह हर साल लगभग 50.29 विकला बढ़ता है।
- शहरों के अक्षांश-देशांतर GeoNames (geonames.org, CC BY 4.0) से लिए गए हैं। अभी 20 शहर उपलब्ध हैं।
हमारे नियम
- पंचांग दिवस: एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। किसी दिन की तिथि, नक्षत्र आदि वे हैं जो उस दिन सूर्योदय पर चल रहे हों।
- सूर्योदय और सूर्यास्त: जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखे, वायुमंडल से होने वाले प्रकाश के मुड़ाव (अपवर्तन) को जोड़कर।
- चंद्रोदय और चंद्रास्त: जब चंद्रमा का केंद्र क्षितिज पर हो, अपवर्तन के बिना। जिस पंचांग दिवस में चंद्रोदय नहीं होता, वहाँ हम यही लिखते हैं।
- तिथि: चंद्रमा और सूर्य के भोगांश का अंतर, हर 12 अंश पर एक तिथि। करण: हर 6 अंश पर एक।
- नक्षत्र: चंद्रमा का निरयन भोगांश, 13 अंश 20 कला के 27 भाग। योग: सूर्य और चंद्रमा के निरयन भोगांश का जोड़, उसी तरह 27 भाग।
- मास: अमांत मास उस राशि से तय होता है जिसमें मास शुरू करने वाली अमावस्या के समय सूर्य हो। अगर दो अमावस्याओं के बीच सूर्य राशि न बदले, तो वह अधिक मास है। पूर्णिमांत मास में कृष्ण पक्ष अगले मास के नाम से गिना जाता है।
- राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल: सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन के आठ बराबर भागों में से, वार के अनुसार एक भाग।
- अभिजित मुहूर्त: दिन के 15 बराबर मुहूर्तों में से आठवाँ। बुधवार को हम अभिजित मुहूर्त नहीं दिखाते, क्योंकि जिस पंचांग से हम मिलान करते हैं वह बुधवार को इसे नहीं देता।
- ब्रह्म मुहूर्त: पिछली रात के 15 बराबर मुहूर्तों में से चौदहवाँ, यानी सूर्योदय से दो मुहूर्त पहले शुरू होकर एक मुहूर्त पहले खत्म।
- चौघड़िया: दिन और रात दोनों के आठ-आठ बराबर भाग, वार के अनुसार तय क्रम में।
- समय: सभी समय भारतीय मानक समय (IST, UTC+5:30) में, पास के पूरे मिनट तक गोल किए हुए।
जाँच कैसे करते हैं
हर बार साइट बनने से पहले एक जाँच अपने आप चलती है। यह हमारी गणना को drikpanchang.com के दिवस पंचांग पेजों से लिए गए मानों से मिलाती है: 20 शहर, 2026 और 2027 की कई तारीखें, सातों वार और एक अधिक मास की तारीख। अगर कोई भी समय एक मिनट से ज़्यादा अलग हो या कोई नाम (तिथि, नक्षत्र, योग, करण, मास, संवत) मेल न खाए, तो साइट नहीं बनती।
| आख़िरी जाँच | 28 अक्टूबर 2026 |
|---|---|
| शहर और तारीख के जोड़े | 206 |
| कुल जाँचें | 8642 |
| सबसे बड़ा अंतर | 1 मिनट |
| बेमेल | 0 |
चौघड़िया का दिन और रात का क्रम हमने सातों वारों के लिए prokerala.com से मिलाया (28 अक्टूबर 2026)।
एक बात हम खुलकर बताते हैं: तिथि, नक्षत्र, योग और करण के समाप्ति समय में हम वही परिपाटी अपनाते हैं जिससे हमारे समय drikpanchang.com से मिनट तक मिलते हैं। इसके बिना हमारे समय उनसे लगभग एक मिनट बाद आते थे। अलग-अलग पंचांगों में एक-दो मिनट का ऐसा अंतर आम है और गणना की परिपाटी से आता है।
हम क्या नहीं करते
हम भविष्यफल, कुंडली या किसी काम के लिए व्यक्तिगत मुहूर्त नहीं बताते। राहु काल या चौघड़िया को शुभ-अशुभ मानना परंपरा और आस्था की बात है; हम केवल उनका सही समय देते हैं। विवाह, गृह प्रवेश जैसे बड़े कामों का मुहूर्त अपने पुरोहित या ज्योतिषी से तय करवाएँ।
कोई गलती दिखे तो हमें बताएँ, शहर और तारीख के साथ। हम उसे जाँच में जोड़कर ठीक करेंगे।