आज का चौघड़िया, 28 अक्टूबर 2026
नई दिल्ली, दिल्ली के लिए, बुधवार। सभी समय IST में।
दिन का चौघड़िया
सूर्योदय से सूर्यास्त| चौघड़िया | समय | प्रकृति |
|---|---|---|
| लाभ (Labh) | 06:30 AM से 07:54 AM | शुभ |
| अमृत (Amrit) | 07:54 AM से 09:17 AM | शुभ |
| काल (Kaal) | 09:17 AM से 10:41 AM | अशुभ |
| शुभ (Shubh) | 10:41 AM से 12:05 PM | शुभ |
| रोग (Rog) | 12:05 PM से 01:28 PM | अशुभ |
| उद्वेग (Udveg) | 01:28 PM से 02:52 PM | अशुभ |
| चर (Char) | 02:52 PM से 04:16 PM | शुभ |
| लाभ (Labh) | 04:16 PM से 05:39 PM | शुभ |
रात का चौघड़िया
सूर्यास्त से अगले सूर्योदय| चौघड़िया | समय | प्रकृति |
|---|---|---|
| उद्वेग (Udveg) (अभी) | 05:39 PM से 07:16 PM | अशुभ |
| शुभ (Shubh) | 07:16 PM से 08:52 PM | शुभ |
| अमृत (Amrit) | 08:52 PM से 10:29 PM | शुभ |
| चर (Char) | 10:29 PM से 12:05 AM, 29 अक्टूबर | शुभ |
| रोग (Rog) | 12:05 AM, 29 अक्टूबर से 01:42 AM, 29 अक्टूबर | अशुभ |
| काल (Kaal) | 01:42 AM, 29 अक्टूबर से 03:18 AM, 29 अक्टूबर | अशुभ |
| लाभ (Labh) | 03:18 AM, 29 अक्टूबर से 04:54 AM, 29 अक्टूबर | शुभ |
| उद्वेग (Udveg) | 04:54 AM, 29 अक्टूबर से 06:31 AM, 29 अक्टूबर | अशुभ |
पूरे दिन की समय रेखा
सूर्योदय 06:30 AM से अगले सूर्योदय 06:31 AM तक। किसी खाने पर टैप करें, उसका पूरा समय यहाँ दिखेगा।
चौघड़िया कैसे निकलता है
सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को आठ बराबर भागों में और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक की रात को भी आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। हर भाग एक चौघड़िया है। "चौघड़िया" नाम चार घड़ी से बना है: एक घड़ी 24 मिनट की होती है, यानी बारह घंटे के दिन में एक चौघड़िया लगभग 96 मिनट का होता है। दिन छोटा हो तो दिन के चौघड़िया छोटे और रात के लंबे हो जाते हैं।
सात चौघड़िया हैं: उद्वेग, चर, लाभ, अमृत, काल, शुभ और रोग। दिन का पहला चौघड़िया वार से तय होता है (रविवार को उद्वेग, सोमवार को अमृत, मंगलवार को रोग, बुधवार को लाभ, गुरुवार को शुभ, शुक्रवार को चर, शनिवार को काल) और फिर इसी क्रम में आगे चलता है। रात का क्रम अलग है और रात का पहला चौघड़िया भी वार से तय होता है।
परंपरा में अमृत, शुभ, लाभ और चर को शुभ, और उद्वेग, काल और रोग को अशुभ माना जाता है। यह मान्यता पर आधारित है; हम केवल हर भाग का सही समय देते हैं।
राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल भी दिन के आठ भागों पर ही आधारित हैं; उन्हें राहु काल पेज पर देखें।