रोज़ पंचांग

पंचांग21 मई 2030, मंगलवार

पंचमी Panchami

कृष्ण पक्ष, ज्येष्ठ मास · नई दिल्ली

पंचमी तिथि21-22 मई की रात 01:00 AMतक

शहर और तारीख

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चंद्रमा 83% प्रकाशित
दिन का पहला चौघड़िया
रोग (Rog)
अशुभ, 07:10 AM तक
राहु काल
03:43 PM से 05:26 PM
सूर्योदय / सूर्यास्त
05:27 AM / 07:08 PM

सूर्योदय और सूर्यास्त

नई दिल्ली
राहु काल: 03:43 PM से 05:26 PMयमगण्ड: 08:53 AM से 10:35 AMगुलिक काल: 12:18 PM से 02:00 PMअभिजित मुहूर्त: 11:50 AM से 12:45 PMसूर्योदय05:27 AMसूर्यास्त07:08 PMमध्याह्न 12:18 PM
राहु काल 03:43 PM से 05:26 PM। दिन के आठ बराबर भागों में से वार के अनुसार एक भाग। परंपरा में इस समय नया काम शुरू करना टाला जाता है।

शुभ और अशुभ मुहूर्त

शुभ
ब्रह्म मुहूर्त
04:05 AM से 04:46 AM
सूर्योदय से पहले का समय; परंपरा में पूजा और ध्यान के लिए माना जाता है।
शुभ
अभिजित मुहूर्त
11:50 AM से 12:45 PM
दिन के बीच का मुहूर्त; परंपरा में शुभ माना जाता है।
अशुभ
राहु काल
03:43 PM से 05:26 PM
दिन के आठ भागों में से एक; परंपरा में इस समय नया काम शुरू करना टाला जाता है।
अशुभ
यमगण्ड
08:53 AM से 10:35 AM
राहु काल की तरह दिन के आठ भागों में से एक; परंपरा में अशुभ माना जाता है।
अशुभ
गुलिक काल
12:18 PM से 02:00 PM
राहु काल की तरह दिन के आठ भागों में से एक; परंपरा में अशुभ माना जाता है।

पूरा पंचांग

तिथि Tithi
पंचमी (Panchami) 21-22 मई की रात 01:00 AM तक
षष्ठी (Shashthi) अगले सूर्योदय तक
नक्षत्र Nakshatra
पूर्वाषाढ़ा (Purva Ashadha) 08:19 AM तक
उत्तराषाढ़ा (Uttara Ashadha) अगले सूर्योदय तक
योग Yoga
शुभ (Shubha) 02:53 PM तक
शुक्ल (Shukla) अगले सूर्योदय तक
करण Karana
कौलव (Kaulava) 02:03 PM तक
तैतिल (Taitila) 21-22 मई की रात 01:00 AM तक
गर (Garaja) अगले सूर्योदय तक
पक्ष
कृष्ण पक्ष
वार
मंगलवार
सूर्योदय / सूर्यास्त
05:27 AM / 07:08 PM
चंद्रोदय / चंद्रास्त
11:10 PM / 09:09 AM
दिनमान
13 घंटे 41 मिनट (सूर्योदय से सूर्यास्त तक)
सूर्य / चंद्र राशि
वृषभ / धनु (सूर्योदय पर)
मास
ज्येष्ठ (पूर्णिमांत)
वैशाख (अमांत)
पूर्णिमांत गिनती में महीना पूर्णिमा के बाद बदलता है, अमांत में अमावस्या के बाद। इसलिए कृष्ण पक्ष में दोनों के नाम अलग होते हैं; तिथि वही रहती है।
संवत
विक्रम 2087, शक 1952
वर्ष गिनने की दो पारंपरिक गणनाएँ।

दिन भर की समय रेखा

सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
तिथि
नक्षत्र
योग
करण
चौघड़िया

सूर्योदय 05:27 AM से अगले सूर्योदय 05:27 AM तक। किसी खाने पर टैप करें, उसका पूरा समय यहाँ दिखेगा।

इस महीने की तिथियाँ और चंद्रमा

‹मई 2030›

हर दिन के नीचे उस दिन सूर्योदय के समय की तिथि है (नई दिल्ली के अनुसार)। शु. = शुक्ल पक्ष, कृ. = कृष्ण पक्ष। पूर्णिमा, अमावस्या और एकादशी तिथि रंग से अलग दिखाई गई हैं। "व्रत" उस दिन लिखा है जिस दिन स्मार्त एकादशी व्रत है, जो कभी-कभी रंग वाली तिथि से अलग दिन होता है; यह केवल दो स्रोतों से मिलाई गई तारीखों पर दिखता है। आज का दिन घेरे में है। पूरी सूची और पारण का समय एकादशी पेज पर है।

कल का पंचांग देखकर योजना बनाते समय दो बातें

तिथि सूर्योदय से गिनी जाती है। पंचांग में किसी दिन की तिथि वह मानी जाती है जो उस दिन सूर्योदय के समय चल रही हो। अगर कोई तिथि दोपहर में शुरू होती है, तो वह अगले दिन के सूर्योदय पर भी चल रही हो सकती है। इसलिए ऊपर तिथि के साथ उसका समाप्ति समय भी दिया है।

व्रत और पर्व की तारीख अलग नियम से तय होती है। कई व्रत (जैसे एकादशी) और पर्व इस बात पर भी निर्भर करते हैं कि तिथि दिन के किस भाग में है। इसलिए किसी व्रत की तारीख के लिए केवल सूर्योदय की तिथि न देखें।

आज का पंचांग देखने के लिए आज का पंचांग खोलें। किसी और तारीख का पंचांग ऊपर "अगला दिन" या महीने के कैलेंडर से देखा जा सकता है।

कल के पंचांग से जुड़े सवाल

कल कौन सी तिथि है?

नई दिल्ली में 21 मई 2030 को सूर्योदय के समय कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि रहेगी, जो 21-22 मई की रात 01:00 AM तक रहेगी। नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा रहेगा।

कल राहु काल कब है?

नई दिल्ली में 21 मई 2030 को राहु काल 03:43 PM से 05:26 PM तक रहेगा। हर शहर का समय अलग होता है; दूसरे शहर के लिए ऊपर शहर बदलें या राहु काल पेज देखें।

क्या कल का पंचांग अभी से पक्का है?

हाँ। पंचांग के सभी समय सूर्य और चंद्रमा की गणना से निकलते हैं, इसलिए कल या किसी आगे की तारीख का पंचांग आज ही उतना ही सही निकाला जा सकता है जितना आज का। ऊपर "अगला दिन" बटन या महीने के कैलेंडर से आगे की तारीखें देखें।

क्या व्रत की तारीख कल की तिथि से ही तय होती है?

हमेशा नहीं। कई व्रत और पर्व इस पर भी निर्भर करते हैं कि तिथि दिन के किस भाग में है (जैसे एकादशी में दशमी का प्रभाव)। इसलिए किसी व्रत की तारीख के लिए केवल सूर्योदय की तिथि न देखें; अपने परिवार की परंपरा या पुरोहित से पुष्टि करें।