रोज़ पंचांग

पंचांग18 अप्रैल 2030, गुरुवार

पूर्णिमा Purnima

शुक्ल पक्ष, चैत्र मास · नई दिल्ली

पूर्णिमा तिथि08:49 AMतक

शहर और तारीख

आपका स्थान केवल आपके फ़ोन में सबसे पास का शहर ढूँढने के लिए उपयोग होता है; हम उसे कहीं नहीं भेजते।

चंद्रमा 100% प्रकाशित
दिन का पहला चौघड़िया
शुभ (Shubh)
शुभ, 07:30 AM तक
राहु काल
01:58 PM से 03:35 PM
सूर्योदय / सूर्यास्त
05:53 AM / 06:49 PM

सूर्योदय और सूर्यास्त

नई दिल्ली
राहु काल: 01:58 PM से 03:35 PMयमगण्ड: 05:53 AM से 07:30 AMगुलिक काल: 09:07 AM से 10:44 AMअभिजित मुहूर्त: 11:55 AM से 12:47 PMसूर्योदय05:53 AMसूर्यास्त06:49 PMमध्याह्न 12:21 PM
राहु काल 01:58 PM से 03:35 PM। दिन के आठ बराबर भागों में से वार के अनुसार एक भाग। परंपरा में इस समय नया काम शुरू करना टाला जाता है।

शुभ और अशुभ मुहूर्त

शुभ
ब्रह्म मुहूर्त
04:24 AM से 05:08 AM
सूर्योदय से पहले का समय; परंपरा में पूजा और ध्यान के लिए माना जाता है।
शुभ
अभिजित मुहूर्त
11:55 AM से 12:47 PM
दिन के बीच का मुहूर्त; परंपरा में शुभ माना जाता है।
अशुभ
राहु काल
01:58 PM से 03:35 PM
दिन के आठ भागों में से एक; परंपरा में इस समय नया काम शुरू करना टाला जाता है।
अशुभ
यमगण्ड
05:53 AM से 07:30 AM
राहु काल की तरह दिन के आठ भागों में से एक; परंपरा में अशुभ माना जाता है।
अशुभ
गुलिक काल
09:07 AM से 10:44 AM
राहु काल की तरह दिन के आठ भागों में से एक; परंपरा में अशुभ माना जाता है।

पूरा पंचांग

तिथि Tithi
पूर्णिमा (Purnima) 08:49 AM तक
प्रतिपदा (Pratipada) 19 अप्रैल 05:11 AM तक
द्वितीया (Dwitiya) अगले सूर्योदय तक
नक्षत्र Nakshatra
चित्रा (Chitra) 01:16 PM तक
स्वाति (Swati) अगले सूर्योदय तक
योग Yoga
हर्षण (Harshana) 07:13 AM तक
वज्र (Vajra) 18-19 अप्रैल की रात 03:07 AM तक
सिद्धि (Siddhi) अगले सूर्योदय तक
करण Karana
बव (Bava) 08:49 AM तक
बालव (Balava) 07:01 PM तक
कौलव (Kaulava) 19 अप्रैल 05:11 AM तक
तैतिल (Taitila) अगले सूर्योदय तक
पक्ष
शुक्ल पक्ष
वार
गुरुवार
सूर्योदय / सूर्यास्त
05:53 AM / 06:49 PM
चंद्रोदय / चंद्रास्त
07:21 PM / नहीं
दिनमान
12 घंटे 56 मिनट (सूर्योदय से सूर्यास्त तक)
सूर्य / चंद्र राशि
मेष / तुला (सूर्योदय पर)
मास
चैत्र (पूर्णिमांत)
चैत्र (अमांत)
दोनों गिनती में इस समय एक ही महीना है।
संवत
विक्रम 2087, शक 1952
वर्ष गिनने की दो पारंपरिक गणनाएँ।

दिन भर की समय रेखा

सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
तिथि
नक्षत्र
योग
करण
चौघड़िया

सूर्योदय 05:53 AM से अगले सूर्योदय 05:52 AM तक। किसी खाने पर टैप करें, उसका पूरा समय यहाँ दिखेगा।

इस महीने की तिथियाँ और चंद्रमा

‹अप्रैल 2030›

हर दिन के नीचे उस दिन सूर्योदय के समय की तिथि है (नई दिल्ली के अनुसार)। शु. = शुक्ल पक्ष, कृ. = कृष्ण पक्ष। पूर्णिमा, अमावस्या और एकादशी तिथि रंग से अलग दिखाई गई हैं। "व्रत" उस दिन लिखा है जिस दिन स्मार्त एकादशी व्रत है, जो कभी-कभी रंग वाली तिथि से अलग दिन होता है; यह केवल दो स्रोतों से मिलाई गई तारीखों पर दिखता है। आज का दिन घेरे में है। पूरी सूची और पारण का समय एकादशी पेज पर है।

कल का पंचांग देखकर योजना बनाते समय दो बातें

तिथि सूर्योदय से गिनी जाती है। पंचांग में किसी दिन की तिथि वह मानी जाती है जो उस दिन सूर्योदय के समय चल रही हो। अगर कोई तिथि दोपहर में शुरू होती है, तो वह अगले दिन के सूर्योदय पर भी चल रही हो सकती है। इसलिए ऊपर तिथि के साथ उसका समाप्ति समय भी दिया है।

व्रत और पर्व की तारीख अलग नियम से तय होती है। कई व्रत (जैसे एकादशी) और पर्व इस बात पर भी निर्भर करते हैं कि तिथि दिन के किस भाग में है। इसलिए किसी व्रत की तारीख के लिए केवल सूर्योदय की तिथि न देखें।

आज का पंचांग देखने के लिए आज का पंचांग खोलें। किसी और तारीख का पंचांग ऊपर "अगला दिन" या महीने के कैलेंडर से देखा जा सकता है।

कल के पंचांग से जुड़े सवाल

कल कौन सी तिथि है?

नई दिल्ली में 18 अप्रैल 2030 को सूर्योदय के समय शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि रहेगी, जो 08:49 AM तक रहेगी। नक्षत्र चित्रा रहेगा।

कल राहु काल कब है?

नई दिल्ली में 18 अप्रैल 2030 को राहु काल 01:58 PM से 03:35 PM तक रहेगा। हर शहर का समय अलग होता है; दूसरे शहर के लिए ऊपर शहर बदलें या राहु काल पेज देखें।

क्या कल का पंचांग अभी से पक्का है?

हाँ। पंचांग के सभी समय सूर्य और चंद्रमा की गणना से निकलते हैं, इसलिए कल या किसी आगे की तारीख का पंचांग आज ही उतना ही सही निकाला जा सकता है जितना आज का। ऊपर "अगला दिन" बटन या महीने के कैलेंडर से आगे की तारीखें देखें।

क्या व्रत की तारीख कल की तिथि से ही तय होती है?

हमेशा नहीं। कई व्रत और पर्व इस पर भी निर्भर करते हैं कि तिथि दिन के किस भाग में है (जैसे एकादशी में दशमी का प्रभाव)। इसलिए किसी व्रत की तारीख के लिए केवल सूर्योदय की तिथि न देखें; अपने परिवार की परंपरा या पुरोहित से पुष्टि करें।